गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

सच्ची पूजा। By Arjuna Bunty.

सच्ची पूजा।


                                                                                                                           By: Arjuna Bunty.


चैनपुर एक छोटा सा गांव था, जिसमें एक नटखट लड़का अपने माता-पिता के साथ रहता था। जिसका नाम था नंद । नंद नटखट तो था पर होशियार भी था। 
अपने से बड़ों का सदा सम्मान और आदर किया करता था तथा दूसरों की भी मदद किया करता था ।
नंद हर रोज अपने घर से देखता एक पंडित जी जिसका नाम सिरोमणी था ,सुबह उठते राधे कृष्ण का जाप  जोर जोर से करते हुए , स्नान करने नदी जाते , और जाप करते हुए लौटते । राधे  कृष्णा ....
उसके बाद मंदिर जाकर भगवान की पूजा करते तब तक आधा दिन पार हो जाता , फिर घर जाकर भोजन ग्रहण करते,  पर पंडित जी अपने  बुड्ढे मां पिताजी की सेवा नहीं करते।
और उन्हें  खाना भी नहीं दिया करते और ना ही कभी अपने माता-पिता के पास जाकर बैठते।
एक रोज नंद पंडित जी के नदी से स्नान कर लौटते देख बोला पंडित जी , पंडित जी , मुझे आपसे कुछ पूछना है - 
पंडित जी ने कहा-  पूछो (बच्चा) बचवा पर जल्दी करना हमें देर हो रही है। मंदिर जाकर भगवान की पूजा करनी है ठीक है।
पंडित बाबा आप कितने दिनों से अपने भगवान की पूजा इस तरीके से करते हैं ।
बबुआ हम तो 5 साल की उम्र से ही कर रहे हैं ।
नंद फिर बोलता है तब तो आपको पता होगा भगवान कैसे होते हैं। यानी आपने इतने दिनों में भगवान से मिल लिया होगा।
पंडित जी ने कहा -  नहीं (बच्चा) बचवा  का है ना भगवान तो busy रहते है ना इस लिए नी देखा.
नंद कहता है -   पर आप तो इतने दिनों से भगवान की पूजा करते हैं और इतना कष्ट भी करते हैं फिर भी आपको भगवान नहीं मिले पंडित जी -नहीं नंद!
नंद फिर कहता है -   मुझे पता है क्यों नहीं मिले ।
पंडित जी पूछते हैं क्यों ?
नंद  कहता है आपको पता है  पंडित बाबा भगवान तो सभी जगह है पर फिर भी वह अपने हर भक्त को या अपने हर बच्चे को देखने के लिए बराबर ध्यान रखने के लिए इस धरती पर रूप बदल कर आए हैं ।
वह रूप संसार के हर घर में मिलता है ।
पंडित जी-  पर हमको तो नहीं मालूम।
नंद कहता है वह रूप ही तो मां-बाप का है आप आज तक अपने भगवान की अवहेलना कर माटी की मूर्ति की पूजा की इसलिए वह भगवान नहीं मिले ।
अगर आप अपने भगवान की पूजा, प्रार्थना ऐसे करते तो शायद आपको भगवान मिल जाते ।
पंडितजी की आंखों में आंसू वह आया। 
उन्होंने नंद को गोद उठा लिया और अपनी गलती की क्षमा मांगी नंद ने कहा यही क्षमा आपको अपने मां पिता से मांगनी चाहिए ।

तो इसलिए बच्चों अगर पूजा ही करनी है, तो भगवान की जगह अपने मां-बाप की करो उस भगवान को तो किसी ने नहीं देखा पर जिस भगवान के दर्शन रोज ही होते हैं उनसे तो आशीर्वाद ले लो फिर हमें किभी मौके ना मिले ।
आप सभी  अभिभावकों से विनती है कि आप अपने छोटे-छोटे बच्चों से आज  से ही भारतीय संस्कार, संस्कृति, तहजीब की खुशबू में सनी ये संस्कार रूपी  बीज बोना शुरू कर दें। ताकि हमारे देश को फिर से भगत सिंह सुखदेव राजगुरु गांधी जैसे सच्चे वीर सेनानी दे सकें।

समाप्त।

गुरुवार, 23 अप्रैल 2020

About Postscript (ebook)







These two ebooks 
1. Postscript
2.शब्दांश 
Written by- Mr. Arjuna Bunty

This book is for Housewife, Students, working people.
If you want to grow your skills, and  your self-belief then
Must read...

Published on Amazon, Google Play Books, and Instamojo...

1. Postscript
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लेखक का सपना।


अचानक
आज सुबह अर्जुन अखबार लेकर दौरा दौरा अपने एक दोस्त के घर पहुंच जाता है जहां देखता है उसके पिता की लाश उसके दरवाजे पर पड़ी है ।
वो बेसुध होकर जमीं पर गिरा पड़ा है, अनुज उठ हुआ क्या ?
ये सब क्या हो गया है कुछ तो बोल और अर्जुन इतना कहते कहते रोने लगा।
अनुज धीरे से अपनी पलकें उठाता है, और धीरे धीरे अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश करता हुआ कहता है---
अर्जुन तू तो जनता है ना मेरे पिता एक लेखक थे , वो अपनी पूरी जिंदगी सामज को समाज का आइना दिखाने में लगे हुए थे फिर फिर क्यों कोई इस बात को नहीं समझता क्यों कोई आज भी हिन्दू , मुस्लिम , जाति , मजहब , बर्चस्व , के नाम पर कमज़ोर का रक्त बहा रहें है समाज के लोग इतने संगदिल, अमानवीय क्यों है, क्यों?

लेखक देश का वो धरोहर है जिसको सम्मान तब मिलता है जब उसके पास जिंदगी  कुछ कम पड़ जाती है , या जिंदगी रहती ही नहीं जैसे प्रेमचन्द को ही ले लीजिए जीते जी कोई उनको वो सम्मान ना दे पाया जिसकी उनको जरूरत थी।

एक लेखक सब कुछ चंद कागज के टुकड़ों पर अपनी सब से सस्ती चीज से जिंदगी लिख देता है ताकि कोई और वो ना सहे जो उसने सहा है। आने वाली नस्लें इसी कागज के चंद टुकड़ों में अपनी सारी खुशियां ढूंढेंगे। परंतु हम एक लेखक के लिए कभी नहीं सोचते लेखक ही है जो किताबों में रंग भरता है, देश का प्रतििधित्व अप्रत्यक्ष रुप से प्रदर्शित करता है, लेखक एक बेरंग सी दुनिया को रंगीन कर देता है, निर्जीव सी चीजों में आग भर देता है, साहब, लेखक कभी अपने लिए नहीं जीता वो सिर्फ आने वाली नस्लों के लिए जीता है। वो कभी अपने लिए नहीं लिखता जब भी लिखता है समाज, देश, राष्ट्र, और मानव जाति के कल्यणार्थ ही लिखता है।
लेकिन हमारा ये समाज कभी इस बात को नहीं जान सकेगा क्योंकि सब को अपना ईगो सर्टिसफाइड करना होता है।
लेखक का सपना इतना ही होता है कि वो एक ऐसी दुनिया बनाना चाहता है जहां प्यार , मोहब्बत, नेकदिली, सम्मान, संस्कृति, संस्कार, इज्जत, इबादत,इनायत, सब कुछ अदभूत हो।
नई पीढ़ी इस बात को समझ ले यही काफी है एक लेखक के लिए।

To be continued....
                


Arjuna Bunty.


जिंदगी।

                             

                           जिंदगी,
बड़ा प्यार है मुझे जिंदगी से, 
लोगों को जिंदगी समझ कहां आती है ये तो एक दिलफेंक ही समझ सकता है कि आखिर जिंदगी है क्या ।
जिंदगी जिंदादिली का नाम है,
जिंदगी एक दूसरे की खुशी में बिताया सुबह शाम है,
जिंदगी अपनों के साथ रोने में,
जिंदगी अपनों के साथ खुशी से रहने में
थोड़ा लड़ने में, थोड़ा झगड़ने में,
थोड़ी मस्ती में, थोड़ी मोहब्बत में ,
किसी की इनायत में, किसी की इबादत में
जिंदगी है उन सभी मुस्कुराते चहरों में।
दोस्तो सच जिंदगी बहुत हसीन है
पर ना जाने किसकी नजर लगी है
की आज कल जिंदगी महरूम हुई जा रही है
जिंदगी पहले तो आकाश में , पहाड़ों में, नदियों में, बहारों में, रेंतो में
खलिहानों में, और तो और टूटे मकानों में मिल ही जाती थी,
पर ,
अब तो ऊंचे मकानों में भी नहीं मिलती जिंदगी।।
Arjuna Bunty.

सच्चा प्रेम

कोई हद से ज्यादा
गर तुझको चाहे
तेरे लिए कोई
सब कुछ लुटाए
मिले गर तुझसे
तो सपने सजाए
तेरे साथ पथरीली रास्तों पर
तक चलता जाए
हो कोई गम तेरा
उसको वह बांट जाए
तूफान आने पर
वह साहिल बन जाए
   चलाएं कोई कटार तो
वह ढाल बन जाए
तो दोस्त समझ लेना
वह कोई और नहीं
तुम्हारा सच्चा प्यार है ।

Arjuna Bunty.


ग़म के फसाने।



यूं बयां भी ना करें
जो गम के फसाने हैं ।
मोहब्बत कौन जाने
किस किसको निभाने हैं ।
भले गुमनामी में जीते हैं
आशिकों के नगमे सभी ने जाने हैं ।
मोहब्बत में मरने वालों के
ये किस्से पुराने है ।
इन वादियों में कितने
न जाने , कितने खजाने हैं ।
यूं बयां भी ना करें
जो गम के फसाने हैं ।
Arjuna Bunty


तेरे आने से!

तेरे आने से!


यूं तो जिंदगी में,
गमों का आसरा था
इक तेरे आने से
खुशी की लहर छाई है।

हर तरफ धूप और तन्हाई
की बदरी छाई थी
तेरी जुल्फों का करम है
जो प्यारी घटा लाई है।

मौसम का मिजाज भी
पूरे सुरूर पर था
बस तेरे आने से
जमकर बरसात आई है।

यूं तो अल्फ़ाज़ नहीं मिलते थे कभी
पर तुझे देखते ही ये नज़्म बन आई है।
Arjuna Bunty।


भरोसे का व्यापार:-

आग्रह। कृपया इस रचना को एकांत में समय देकर और आराम से पढ़े । भरोसे का व्यापार सुनो सुना है व्यापार गिरा है चलो अच्छा है आ...